कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम-2025 के खिलाफ दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में इस अधिनियम को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यह हजारों लोगों की आजीविका को खतरे में डाल सकता है।
न्यायमूर्ति बीएम श्याम प्रसाद ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया और याचिकाकर्ताओं को अधिनियम के कार्यान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने के लिए दलीलें देने की अनुमति दी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि तत्काल कार्यान्वयन से उद्योग को भारी नुकसान होगा। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि सरकार या तो अधिसूचना को रोके या उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए पर्याप्त समय दे।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी अदालत द्वारा इस तरह के कानून की वैधता की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून बनने के बाद अधिसूचना संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालतों को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अदालत ने केंद्र से पूछा कि क्या वह कानून को तुरंत लागू करने का इरादा रखती है। मेहता ने कहा कि वह सरकार से निर्देश लेकर सूचित करेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को याचिकाकर्ता की दलीलों के साथ अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया और सुनवाई स्थगित कर दी।