उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले, परिसीमन प्रक्रिया के कारण महत्वपूर्ण बदलाव होने की संभावना है। शहरीकरण और नए नगर निकायों के निर्माण के कारण, जिला पंचायत सदस्यों की लगभग 40 सीटें कम हो जाएंगी। इसके साथ ही, क्षेत्र पंचायत (बीडीसी) के 1,500 वार्ड और ग्राम पंचायतों के 4,608 वार्ड भी कम हो जाएंगे। पंचायतीराज निदेशक अमित सिंह ने इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि बीते पांच वर्षों में शहरीकरण और नए नगर निकायों के गठन के परिणामस्वरूप त्रिस्तरीय पंचायतों के ढांचे में बदलाव आया है।
परिसीमन के बाद, जिला पंचायत के वार्डों की संख्या घटकर 3,011 रह जाएगी, जो पहले 3,050 थी। इसी तरह, क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी) के वार्डों की संख्या 75,845 से घटकर 74,345 हो जाएगी। ग्राम पंचायतों के वार्डों की संख्या में भी कमी आएगी, जिससे कुल वार्ड 7,32,643 से घटकर 7,28,035 हो जाएंगे।
निदेशक ने बताया कि ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन का काम पूरा हो चुका है। पहले प्रदेश में 58,189 ग्राम पंचायतें थीं, जो अब घटकर 57,694 रह गई हैं। परिसीमन रिपोर्ट तैयार करने का काम तेजी से जारी है। 47 जिलों ने वार्डों के पुनर्गठन की रिपोर्ट शासन को भेज दी है, जबकि 28 अन्य जिलों को जल्द रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है। इन जिलों में रायबरेली, सीतापुर, सुल्तानपुर, बहराइच, महाराजगंज, कानपुर देहात, मऊ, पीलीभीत, आगरा, औरैया, बागपत, बलिया, भदोही, बदायूं, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, झांसी, कासगंज, कौशांबी, कुशीनगर, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रतापगढ़, प्रयागराज, रामपुर, सहारनपुर, संत कबीर नगर और सोनभद्र शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि अगले साल पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई, 2026 को, क्षेत्र पंचायत प्रमुखों का 19 जुलाई, 2026 को और जिला पंचायत अध्यक्षों का 11 जुलाई, 2026 को समाप्त हो रहा है। वार्डों के पुनर्गठन की रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जाएगी।