आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बिलासपुर में कहा कि सच्चा धर्म सभी के साथ अपनत्व का व्यवहार करने और सभी विविधताओं को सौहार्दपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने में निहित है। उन्होंने लोगों को अच्छे इंसान बनने और समाज को खुश रखने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
बिलासपुर में आयोजित ‘लोकहितकारी काशीनाथ – स्मारिका विमोचन समारोह’ में बोलते हुए, भागवत ने स्वयंसेवकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों ने बाधाओं के बावजूद संघ का विस्तार किया है।
भागवत ने जोर देकर कहा कि संघ में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एक साधारण स्वयंसेवक की होती है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों ने अपनेपन की भावना को जागृत किया है, जो पूरे हिंदू समाज में पहले से ही मौजूद है। उन्होंने कहा कि हमें पूर्वजों को याद रखना चाहिए और उनके कार्यों से प्रेरणा लेनी चाहिए। भागवत ने कहा कि 100 वर्षों से स्वयंसेवकों द्वारा की जा रही मौन तपस्या के बल पर हम इस मुकाम तक पहुंचे हैं। उन्होंने अपनेपन की भावना जगाने और दुनिया के सामने एक मिसाल बनने का आह्वान किया।