जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी द्वारा ‘जिहाद’ की व्याख्या, ‘वंदे मातरम’ के प्रति उनका नजरिया और सुप्रीम कोर्ट पर की गई टिप्पणियों ने पूरे देश में एक तीव्र बहस को जन्म दिया है। इन बयानों पर विपक्षी नेताओं और आम जनता के एक बड़े हिस्से की ओर से कड़ी आलोचना की जा रही है, जिससे देश की सांप्रदायिक एकता पर इसके असर को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
खबरों के मुताबिक, मदनी के भाषण पर मौजूद भीड़ ने जोरदार तालियां बजाईं, जिसने समर्थकों को लामबंद करने की उनकी क्षमता पर सवाल उठाए हैं।
‘जिहाद’ शब्द का मूल अर्थ आत्म-नियंत्रण, नैतिक प्रयास या अल्लाह की राह में संघर्ष करना है। परंतु, इतिहास गवाह है कि 712 ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम ने भारत पर पहला हमला ‘जिहाद’ की घोषणा के साथ ही किया था।
**ऐतिहासिक संदर्भ और ‘जिहाद’:**
* इतिहासकारों के अनुसार, मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण को ‘जिहाद’ का नाम दिया था।
* महमूद गजनवी ने ‘जिहाद’ के नाम पर कई मंदिरों को ध्वस्त किया, जिनमें सोमनाथ मंदिर भी शामिल था।
* दिल्ली सल्तनत की स्थापना को भी मोहम्मद गोरी और कुतुबुद्दीन ऐबक जैसे शासकों ने ‘जिहाद’ का परिणाम बताया था।
* अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में चित्तौड़ में हुई बर्बरता, जिसमें हजारों निर्दोषों की हत्या हुई, को भी ‘जिहाद’ के रूप में प्रस्तुत किया गया।
**आधुनिक काल के ‘जिहाद’ के उदाहरण:**
* पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 1965 और 1971 के युद्धों को ‘इस्लाम के नाम पर जिहाद’ करार दिया था।
* जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी समूहों ने अपने हमलों को ‘जिहाद’ के रूप में प्रचारित किया है।
* लश्कर-ए-तैयबा ने 2008 के मुंबई हमलों को ‘जिहाद’ का कृत्य घोषित किया था।
‘जिहाद’ पर अपने बयानों के साथ-साथ, मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों को लेकर भी निराशा जाहिर की है।
इसके अलावा, मौलाना मदनी ने भारत के राष्ट्रगान ‘वंदे मातरम’ पर भी टिप्पणी की और कथित तौर पर मुसलमानों को इसे गाने से रोकने की सलाह दी।
