कोडरमा जिले में, झुमरीतिलैया के वृद्धाश्रम में रह रहे वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण मेडिको–विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। यह आयोजन झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के दिशा-निर्देशों पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कोडरमा द्वारा किया गया। इस पहल का मुख्य लक्ष्य बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं और कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है।
समारोह के दौरान, रांची से झारखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यपालक अध्यक्ष ने मदर टेरेसा क्लिनिक के उद्घाटन का ऑनलाइन अवलोकन किया, जो नगड़ी, रांची के वृद्धाश्रम में स्थापित किया गया है। उन्होंने वहां के वरिष्ठ नागरिकों को चिकित्सा सहायता और अन्य योजनाओं के लाभ वितरित करने की प्रक्रिया को भी देखा।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कोडरमा, बाल कृष्ण तिवारी ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के प्रति सम्मान जताना हमारा परम कर्तव्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बुजुर्गों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रहा है। तिवारी ने इस बात पर बल दिया कि बड़ों का आदर-सत्कार किए बिना प्रगति संभव नहीं है और प्राधिकार इस कार्य से स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है। उन्होंने नई पीढ़ी से बुजुर्गों के अनुभव से सीखने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गौतम कुमार ने बताया कि प्राधिकार बुजुर्गों को बिना किसी शुल्क के कानूनी सलाह और सहायता देने के लिए सदैव तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि वृद्धाश्रम के निवासियों की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखा जाएगा और उन्हें हर संभव मदद पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग, कोडरमा की टीम ने उपस्थित सभी बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। प्रधान जिला जज ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक दवाओं के वितरण के संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने वृद्धाश्रम का दौरा कर निवासियों से मुलाकात की और वहां की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया।
इस अवसर पर, जिला विधिक सेवा प्राधिकार और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में, वृद्धाश्रम के निवासियों को ठंड के मौसम को ध्यान में रखते हुए गर्म कपड़े, जैसे कंबल, शाल, टोपी, ऊनी वस्त्र, साथ ही मिठाइयाँ और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदान की गईं।
