यूरोप में युद्धविराम की संभावना क्षीण होती जा रही है, रूस और यूक्रेन दोनों ही हमले तेज कर रहे हैं। नाटो ने यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी देने की बात कही है, अन्यथा यूरोप में गंभीर परिणाम होंगे। रूस ने भी नाटो का मुकाबला करने के लिए गठबंधन बनाया है।
यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी मिलने या न मिलने पर पूरे यूरोप की सुरक्षा निर्भर करती है। अगर यूक्रेन को सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली, तो यह पुतिन की जीत होगी। डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने से इनकार कर दिया है, लेकिन बैकडोर से मदद जारी रखने की बात कही है। यूरोपीय देश मिलकर सुरक्षा गारंटी का नया फॉर्मूला बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रूस इसे भी मानने से इनकार कर रहा है।
रूस बाल्टिक और नॉर्डिक देशों पर हमले की तैयारी कर रहा है, जो नाटो और अमेरिका पर निर्भर हैं। यूरोपीय देश ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन रूस टकराव के लिए तैयार दिख रहा है। जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी चाहिए, तभी युद्धविराम पर तीसरी वार्ता संभव है।
अमेरिका ने इस तरह की गारंटी से इनकार कर दिया है, लेकिन दूसरे नाटो देश यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी का समर्थन कर रहे हैं। नाटो देश मिलकर अमेरिका पर दबाव बना रहे हैं। जेलेंस्की एक उच्च अधिकारियों की टीम को अमेरिका भेज रहे हैं, जो ट्रंप के विशेष दूत से मुलाकात करेंगे। फ्रांस और जर्मनी ने कहा है कि हालात तीसरे विश्वयुद्ध जैसे हो सकते हैं।
जर्मनी के चांसलर का कहना है कि यूक्रेन कभी भी आत्मसमर्पण नहीं करेगा और पूरा यूरोप उसके साथ है। नाटो देश किससे बात कर रहे हैं, क्योंकि ट्रंप पहले ही सुरक्षा की गारंटी देने से इनकार कर चुके हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि नाटो देश लंबे युद्ध की तैयारी में जुट गए हैं, जिससे यूरोप में विनाश की स्थिति बन सकती है।